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Baba Ramdev पर Supreme court का शिकंजा. Patanjali के गुमराह करने वाले विज्ञापनों का मामला।

20 March, 2024

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देश को योग मुद्राएं सिखाने वाले बाबा रामदेव की विज्ञापन वाली मुद्राएं सुप्रीम कोर्ट को अखर गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बाबा रामदेव को आदेश दिया है – बाबा रामदेव हाज़िर हों, वो इसलिए क्योंकि बाबा रामदेव ने अदालत के नोटिस को इग्नोर मार दिया, उसका जवाब तक नहीं दिया। ये केस है पतंजलि की आर्युवेदिक दवाओँ के गुमराह करने वाले विज्ञापनों का, जिन विज्ञापनों में कहा जाता है कि एलोपैथिक दवाओँ से कहीं ज्यादा असरदार आर्युवेदिक दवाएं हैं वो भी पतंजलि की, जो हर रोग दूर कर सकती हैं। अब कोर्ट ने पतंजलि से जवाब मांगा था, जवाब न मिलने पर जस्टिस हिमा कोहली औऱ अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच नाराज हो गई और उनके वकील साहब से पूछा – क्यों न बाबा रामदेव और पतंजलि के MD आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ अदालत की अवामानना की कार्यवाही शुरू की जाए। 27 फरवरी को पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन यानि IMA की अर्जी पर पतंजलि आर्युवेद के गुमराह करने वाले दवा के ऐसे विज्ञापनों (यहां विज्ञापन दिखाएँ) पर रोक लगाई थी। पिछले साल भी कोर्ट ने कंपनी को मना किया था कि ऐसे मिसलीडिंग विज्ञापन जारी न करे, लेकिन कंपनी सोती रही। IMA ने अपनी याचिका में कहा है कि पतंजलि ने कोविड वैक्सीनेशन और एलोपैथी के खिलाफ निगेटिव प्रचार किया है और ये आर्युवेदिक दवाओँ से बीमारियों के इलाज का झूठा दावा किया है। मजेदार बात ये है कि कोर्ट की मनाही के बाद भी दिसंबर 2023 और जनवरी 2024 में अखबारों में कंपनी ने अपने विज्ञापन छपवाए, IMA ने सुप्रीम कोर्ट को ये विज्ञापन दिखा दिए इनमें डायबिटीज़ औऱ अस्था को पूरी तरह ठीक करने का दावा किया था। इसपर भड़क कर सुप्रीम कोर्ट ये भी कह चुका है कि पतंजलि भ्रामक दावे कर देश को धोखा दे रही है कि उसकी दवाएँ ठीक कर देंगी जबकि इसका कोई ठोस सबूत नहीं है। कोर्ट ने सरकार से भी पूछ लिया था कि आपने कानून के तहत पतंजलि के विज्ञापनों के खिलाफ क्या कार्रवाई की।

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